Ocean'sSpace

समुंद्र और ब्रह्माण्ड में कौन है ज्यादा रहस्यमय | ocean vs space | Mystery of Ocean and Space ?

क्या होगा अगर समुंद्र के अंदर हमे एक नई दुनिया देखने मिल जाएं । और तब क्या होगा जब हमे अपने ब्रह्माण्ड से जुड़ी चीजे पृथ्वी पर मौजुद समुंद्र में मिल जाएं .


समुंद्र पृथ्वी पर मौजुद एक ऐसी जगह जिसे हम आज तक एक्सप्लोर नही कर पाए हैं और सायद आने वाले समय में भी ना कर पाए। पर एक पल के लिऐ मान लिया जाए की हमारे पास समुंद्र को एक्सप्लोर करने की वो ताकत हे और हम समुंद्र को एक्सप्लोर कर लिऐ तो जरा सोचिए की वहा क्या – क्या मौजुद होगा । वहीं अगर बात करे अपने स्पेस की तो इसे आप ऐसे समझो जेसे किसी जंगल में सुई ढूंढने जैसा है मतलब हमारा सोलर सिस्टम जोकि इस पुरे ब्रह्माण्ड में ना के बराबर है यानी की हम अभी तक सही से अपने सोलर सिस्टम को भी एक्सप्लोर नही किए हैं तो हमे केसे पता चलेगा की इस पुरे ब्रह्माण्ड में क्या – क्या छुपा है

ओर इसी तरह से हमारा समुंद्र है कहने को तो ये हमारे करीब हैं मगर हम नहीं जानते की इन समुंद्र के अन्दर क्या क्या राज छुपा है तो यार अब सवाल ये उठाता हे की आखिर समंदर और ब्रह्माण्ड में से किस जगह पर एक्सप्लोर करना सही होगा । मतलब की इनमे से कोन अपने आप में सबसे ज्यादा रहस्य समेटे हुए है।

स्पेस:

• दोस्तो जब भी हम स्पेस के बारे में सोचते हैं तो हमारी आंखो के सामने एक ऐसी चीज की इमेज बनती है जो अनंत तक फैली हुई है और जहाँ तक हम कभी नहीं पहुंच सकते। लेकिन अगर बात करें समुंद्र की तो ये स्पेस की तुलना में काफी हद तक सीमित हैं और हम कई सदियों से इनको शिप की मदद से एक्सप्लोर कर रहे हैं। दोस्तो आपको बता दूं स्पेस एक्सप्लोरेशन को शुरू हुए अभी महज सौ साल भी नहीं हुए होंगे। ओर इस बात को जानकर इसको तो ऐसा लगता है की हम समुंद्र के बारे में स्पेस से काफी ज्यादा जानते होंगे लेकिन क्या ये वाक्य सच है? वैल इसका जवाब काफी उलझा हुआ है बेसक हम अपने समुंद्र को कई 100 सालों से एक्स्प्लोर करने में लगे हुए हैं लेकिन अभी भी ऐसा बहुत कुछ है जो हमने एक्सप्लोर नहीं किया है या यू कहे की इंसानी आंखो ने अभी भी जिस समुद्र को देखा है वो तो कुछ भी नहीं है। जैसे कि आप जानते हैं कि हमारी धरती का 71% एरिया पानी से घिरा हुवा है। अगर बात सिर्फ समुंद्र की करें तो पृथ्वी के 70% एरिया पर सिर्फ समुंद्र का ही राज है। अगर बात करे समुंद्री एक्स्प्लोरेशन की हिस्ट्री की तो ये उतनी ही पुरानी है जितना कि हम इंसान खुद।

आज से करीब साढे छह हजार साल पहले ancient Greek और चाइनीज लोगों ने खाने की तलाश में समुंद्र को एक्सप्लोर करना शुरू कर दिया था. और करीब छह हजार साल पहले ancient Egyptsun ने शुरूआती पानी के जहाज बना लिऐ थे ।उसके बाद किस तरह इंसानों ने एक एक करके समुद्र के जरिए दुनिया के अलग अलग भागों को खोजा था। एक अंदाजे के मुताबिक हमारे समुंद्र में कुल 1.3×10 की पावर 21 लीटर पानी है वेस्ट Pacific Ocean में स्थित मेरियाना ट्रेंच का चैलेंजर डीप आज तक का खोजा गया सबसे डीपेस्ट पॉइंट है। ये हमारे सी लेवल से दस हजार नौ सौ चौरासी मीटर्स नीचे हैं।हम समुंद्र में जितने अंदर जाते हैं हमारे ऊपर मौजूद पानी हम पर उतना ही ज्यादा प्रेसर डालता है। चैलेंजर डीप में पहुंची सबमरीन पर इतना ज्यादा फाॅर्स होता हैं जितना आपकी उंगली पर एक हाथ के चलने के कारण लगेगा। मतलब कि आप सोचो कितना ज्यादा प्रेसर है । पर मैं यहाँ आपको ये बात साफ कर देना चाहता हूँ की समुद्र में इतने घराई में पहुंचने का मतलब ये नहीं है कि हम ने वहाँ तक सब कुछ एक्स्प्लोर कर लिया है। समुद्र के अंदर कौन कौन से जीव मौजुद है इस से हम आज भी काफी हद तक अनजान है। वहीं अगर बात करें स्पेस की तो स्पेस में होने वाली घटनाओं के बारे में भी काफी कुछ इन्फॉर्मेशन हमें हमारी इतिहास में मिलती है। लेकिन अंतरिक्ष में इंसान की पहली एक्सप्लोरेशन शुरू हुई थीं 4 अक्टूबर 1957 को. दरअसल रशिया ने स्पुटनिक 1 नाम की सैटलाइट को स्पेस में भेजा था। 12 अप्रैल 1961 को रसिया के ही यूरी गैगरीन स्पेस में जाने वाले पहले इंसान बने और 20 जुलाई 1969 को अमेरिका के नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले इंसान बन बन गए हमारे देखे जाने वाले यूनिवर्स का डायामीटर 9 हजार 3 सौ करोड लाइट ईयर्स माना जाता हैं मतलब की ये सिर्फ वो युनिवर्स है जिसको अभी तक हम जान पाए हैं पृथ्वी से 3 हजार 2 सौ करोड लाइट ईयर्स दूर स्थित GNZ11 गैलेक्सी वो सबसे दूर का ऑब्जेक्ट है जिसे हम अपने सबसे एडवांस टेलिस्कोप की मदद से देख पाएं हैं जरा सोचो की यूनिवर्स कितना बडा है अगर बात करें हमारे समुंद्र की तो वो भी कुछ कम नहीं . हमारी धरती पर हम अभी तक 13लाख जीवित इस्पिसिस को एक्सप्लोर कर चुके हैं जिनमें से करीब चार लाख इस्पिसिस समुंद्र में ही रहती है। लेकिन साइंटिस्ट का ये मानना है कि पृथ्वी पर टोटल 87 लाख इस्पिसिस हो सकती है और इनमें से ज्यादातर स्पेसीज हमें समुंद्र में ही देखने मिलेंगे। पर आप जानकर चोक जाओगे की आज तक हम अपने समुंद्र का सिर्फ 5% भाग ही एक्स्प्लोर कर सके हैं ना जाने बाकी के 95% भाग में हमें क्या क्या मिल सकता है। क्या पता विलुप्त कहे जाने वाली megalodon समुद्र की गहराइयों में आज भी रहती हो । ओर क्या पता कि पृथ्वी पर इंसानों की तरह ही कोई इंटेलिजेंट इस्पिसिस समुद्र की गहराइयों में रहती हो। जैसा की आपने हॉलिवुड मूवी में अटलांटिक के बारे में देखा होगा।

क्या पता वो सिटी आज भी समुद्र के अंदर कहीं हो जरा सोचो क्या क्या होने की संभावना नहीं हो सकती। वहाँ इतनी सुंदर जीव मौजुद हो सकते हैं जिन्हें देखकर हम अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर सकेंगे और इतने खतरनाक भी हो सकते हैं जो पूरे ह्यूमन स्पेस इसको बर्बाद कर दे । वैसे मजेदार बात तो ये है कि हम सभी लोग उसी ओकसीजन में सांस ले रहे हैं जिसमें वो ले रहे हैं और क्या पता कहीं वो ऑक्सीजन के बिना भी सांस ले सकते हो। वहीं दूसरी तरफ अगर बात करें स्पेस की तो हम ने आज तक यूनिवर्स में जो कुछ भी देखा है वो तो समुंद्र के 5% से भी कम है।

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